विकासात्मक गतिविधिया
वर्ष 1990 के आरंभ से सीसीआई स्वयं, अपने लाभ का कुछ भाग लगाते हुए विकासात्मक गतिविधियों का संचालन करता रहा है, जिनका मुख्य उद्देश्य कपास की गुणवत्ता और उपज के साथ-साथ किसानों की आय में सुधार लाना है । फरवरी, 2000 में कपास प्रौद्योगिकी मिशन की स्थापना के बाद अधिकांश विकासात्मक गतिविधियाँ टीएमसी के कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आ गयी हैं । फिर भी, राज्य कृषि विभागों के प्रयत्नों में और भारत सरकार की अन्य योजनाओं में सहयोग देने के लिए सीसीआई ने अपनी कुछ विकासात्मक गतिविधियाँ निम्न प्रकार से जारी रखी हैं :-
सघनित कपास खेती (संविदा खेती )
देश में प्रति हेक्टर कम उपज होने के साथ-साथ कपास की गुणवत्ता भी तुलनात्मक रूप से अधिक संदूषित है । जबकि उत्पादन की ऊँची लागत और घटी हुई उत्पादकता कपास किसानों के हित को हानि पहुँचाती है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता मिलों को इस उपलब्ध कपास का उपभोग करने में कठिनाई होती है, जो यह ट्रैश और संदूषण की अत्यधिक मात्रा वाली किस्मों का संमिश्रण होती है ।
सभी संबंधितों के बीच सहबध्दता करते हुए सघनित कपास खेती करने की प्रेरणा जोर पकड़ रही है, ताकि कपास उत्पादकों का प्रति हेक्टर कपास उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ वस्त्रोद्योग की आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तावाली कपास पैदा की जा सके । किसानों से अपेक्षा है कि वे संविदा खेती के लिए संघ बनायें तथा वस्त्र मिलों एवं अन्य समन्वय एजेन्सियों को ऐसी कपास उपज के लिए विभिन्न निवेशों और विपणन समर्थन सहित सभी विस्तार सेवाओं का कार्य सौंपा गया है । इस विस्तारित योजना से दोनों को यानि कपास किसानों को उत्पादन की घटी हुई लागत और अधिक उत्पादकता से तथा वस्त्र मिलों को अंतर्राष्ट्रीय मानंदडों की गुणवत्ता वाली कपास की प्राप्ति होने का लाभ मिलेगा ।
संविदा खेती द्वारा कपास उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए, सीसीआई वर्ष 2002-03 से सभी महत्वपूर्ण कपास उत्पादक राज्यों में किसान संघों के साथ कई समझौता ज्ञापनों पर प्रति वर्ष हस्ताक्षर कर रहा है । वर्ष 2006-07 से सीसीआई द्वारा की गयी संविदा खेती का ब्यौरा निम्नानुसार है :-
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वर्ष
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क्षेत्र हेक्टर में
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शामिल किसानों की
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गांवों की संख्या
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2006-07
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32810
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12882
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306
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2007-08
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40044
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11777
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361
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2008-09
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46837
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15139
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294
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2009-10
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46272
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15191
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208
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2010-11
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48649
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19847
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224
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2011-12
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47246
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16155
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469
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कपास प्रौद्योगिकी मिशन:
फरवरी, 2000 में 9वी योजना के अंतर्गत देश में कपास की गुणवत्ता और उत्पादकता में ठोस सुधार लाने के उद्देश्य से कपास प्रौद्योगिकी मिशन की स्थापना की गयी । यह कपास के विकास के सभी पक्षों, यानि अनुसंधान से लेकर उत्पादन, विपणन और संसाधन पर विचार करता है ताकि देश में देशी और निर्यात आवश्यकता को पूरा किया जा सके । यह मिशन 10वीं योजना में भी परिचालित रहेगा ।
कपास प्रौद्योगिकी मिशन में 4 मिनी मिशन हैं । मिनी मिशन-I (अनुसंधान) की नोडल एजेन्सी आयसीएआर है और मिनी मिशन-II (प्रौद्योगिकी स्थानांतरण) की नोडल एजेन्सी कृषि एवं सहकारिता विभाग है, जबकि मिनी मिशन-III (बाजार संरचना का विकास) और मिनी मिशन-IV (जिनिंग एवं प्रेसिंग फैक्टरियों का आधुनिकीकरण /उच्चीकरण) का नियंत्रण सीसीआई की मार्फत वस्त्र मंत्रालय द्वारा किया जाता है । मिनी मिशन-III के अंतर्गत मंजूर किए गए 250 मार्केट यार्डस् में से 246 मार्केट यार्ड पूर्ण हो चुके हैं और मिनी मिशन-IV के अंतर्गत मंजूर की गई 1011 जिनिंग एवं प्रेसिंग इकाईयों में से 859 जिनिंग एवं प्रेसिंग फैक्टरियाँ आधुनिकीकृत होने की रिपोर्ट है ।