कपास की खरीद
भारतीय कपास निगम सार्वजनिक क्षेत्र में एक मुख्य संगठन के रूप में अधिकृत मार्केट यार्डस में एपीएमसी द्वारा आयोजित खुली नीलामी द्वारा कपास (सीड कॉटन) खरीदने में अहम भूमिका निभाता है । सीसीआई के अधिकारी इन नीलामियों में आवकों के पहले दिन से उपस्थित रहते हैं और बाजार में अंतिम आवक तक रहते हैं । सीसीआई द्वारा इन बाजारों में नियमित उपस्थिति और नियमित खरीद कपास किसानों को उनकी उपज की गुणवत्ता के अनुरूप मूल्य प्राप्त कराने में सहायता देते हुए प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनाती है । कपास की संपूर्ण मात्रा खुले नीलामी में तथा एपीएमसी अधिकारियों के कड़े पर्यवेक्षण के अंतर्गत अन्य व्यापारियों और मिलों के साथ प्रतिस्पर्धा में खरीदी जाती है । विभिन कपास उत्पादक राज्यों में 220 केंद्रों से भी अधिक केंद्र परिचालित हैं तथा गत वर्षों से सीसीआई कपास उत्पादकों के बीच विश्वास पैदा करने में सफल रहा है, जो कपास की नीलामी के समय सीसीआई के प्रतिनिधियों की उपस्थिति की अनिवार्यता पर बल देते हैं । ये सभी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य कार्य संचालन अथवा वाणिज्यिक कार्य के अंतर्गत की जाती है ।
समर्थन मूल्य कार्य:
प्रत्येक उपज वर्ष के लिए भारत सरकार मूल दो किस्मों यानि जे-34(राजस्थान) और एच-4 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निश्चित करती है । अन्य किस्मों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य वस्त्र आयुक्त कार्यालय, मुंबई द्वारा गुणवत्ता अंतर तथा दो मूल किस्मों से विभिन किस्मों के बाजार अंतर पर निर्भर करते हुए किये जाते हैं । जब कभी किसी किस्म के बाजार मूल्य, न्यूनतम समर्थन मूल्य स्तर तक पहुँच जाते हैं तब सीसीआई भारत सरकार की एक नोडल एजेन्सी के रूप में तुरंत बाजार हस्तक्षेप करता है और बिना किसी मात्रात्मक सीमा के कपास न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदता है । विभिन किस्मों के न्यूनतम समर्थन मूल्य, एफएक्यू ग्रेड कपास के लिए न्यूनतम गुणवत्ता मानदंड, स्टेपल लेंग्थ और मायक्रोनेयर वैल्यू पर निर्धारित करते हुए निश्चित किये जाते हैं । चूंकि मार्केट यार्ड में आयी हुई कपास की कुल आवकें निर्धारित एफएक्यू ग्रेड की मानदंडों के अनुरूप नहीं होती हैं, इसलिए निगम एफएक्यू ग्रेड से नीचे की कपास भी गुणवत्ता के अनुरूप तथा संबंधित किस्म के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अंतर्गत मूल्य प्रस्तव देते हुए खरीद करता है । इससे कपास किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य कार्य के अंतर्गत अपनी कपास बेचने में सहायता मिलती है और महबूरन बिक्री से बचाव मिलता है । निगम सभी कपास उत्पादक राज्यों में समर्थन मूल्य कार्य की स्थितियों का सामना करने के लिए स्वयं को तैयार रखता है । इन कार्याें की गहनता पर निर्भर करते हुए, नियमित खरीद केंद्रों के रूप में तथा सैटलाईट केंद्रों के रूप में निगम संरचना तैयार करता है , ताकि किसानों को अपनी कपास की उपज बेचने के लिए लंबी यात्रा न करनी पड़े । सैटलाईट केंद्रों द्वारा कपास के संसाधन की व्यवस्था सीसीआई द्वारा निकटस्थ संसाधन केंद्रों पर की जाती है ।
न्यूनतम समर्थन मूल्य मशीनरी द्वारा कपास की खरीद ने देश के कपास किसानों को उनकी कपास के निश्चित मूल्य तथा समय पर भुगतान सुनिश्चित करते हुए बड़े स्तर पर लाभ पहुंचाया है तथा कपास पैदावार में उनकी रूचि बनाये रखने में भी सहायता दी है । वर्ष 1990 के दशक के अंत तक तथा वैश्वीकरण प्रक्रिया के आरंभ से पहले, देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य कार्य के मौके बहुत ही विरल थे क्योंकि देशी कपास मूल्य सामान्यत: अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों से ऊपर बने रहे । फिर भी, वैश्वीकरण के साथ वर्ष 1998-99 से और उसके बाद से देशी मूल्यों के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों के समकक्ष बने रहने के कारण कपास मूल्यों के न्यूनतम समर्थन मूल्य स्तर तक पहुँचने के मौके बढ़ गये हैं ।
न्यूनतम समर्थन मूल्य कार्य के राज्यवार ब्यौरे
वाणिज्यिक कार्य:
न्यूनतम समर्थन मूल्य कार्य के अभाव में सीसीआई देशी बाजार में मिलों को कपास की आपूर्ति के लिए केवल अपनी जोखिम पर लाभप्रद वाणिज्यिक कार्य-संचालन करता है । वाणिज्यिक कार्य-संचालन के अधीन कपास की खरीद अधिकृत मार्केट यार्डस में एपीएमसी द्वारा आयोजित नीलामी में होती है । ये वाणिज्यिक कार्य-संचालन मूलत: मांगपत्र तथा संस्थागत क्षेत्र एवं निजी क्षेत्र के अधीन मिलों से अपेक्षित तत्काल मांग के अनुरूप होते हैं । इन संचालनें का मुख्य उद्देश्य निगम द्वारा समर्थन मूल्य
कार्यो के लिए अनुरक्षित न्यूनतमसंरचना की वार्षिक लागत को पूरा करना है । यहाँ पुन: सीसीआई के अधिकारी बाजार में निजी व्यापारी और मिलों के साथ अन्य खरीददारों की प्रतिस्पर्धा में कपास उत्पादकों से कपास की खरीद प्रतिस्पर्धी मूल्यों का भुगतान करते हुए करते हैं । कपास उत्पादकों के लाभ के लिए, सीसीआई बाजार स्थिर होने की स्थिति में त्वरित गति से और बाजार मूल्य ऊँचे होने पर गति धीमी करके करता है, ताकि आवश्यक स्थिरता लायी जा सके तथा विद्यमान बाजार मूल्यों को वांछित दिशा दी जा सके । सीसीआई द्वारा दिये गये मूल्य न केवल समर्थन मूल्यों से ऊँचे होते हैं, बल्कि बाजार में विद्यमान ऊँचे मूल्यों के समकक्ष होते हैं । इसके अलावा कपास के सभी ग्रेड्स के लिए खरीद एक-साथ की जाती है ताकि किसान अपनी उपज बिना कठिनाई के बेच सकें तथा अपनी उपज की गुणवत्ता के अनुरूप बिक्री मूल्य प्राप्त कर सके । यद्यपि वाणिज्यिक कार्य-संचालन वाणिज्यिक लाभप्रदता को ध्यान में रखते हुए किया जाता है, फिर भी, यह कपास मूल्यों के स्थितीकरण द्वारा कपास उत्पादकों को लाभ देता है।
वाणिज्यिक कार्य के राज्यवार ब्यौरे